Q.1 - मौलिक अधिकारों का महत्व
Ans . (1) मौलिक अधिकार संविधान की उद्देशिका में दिए गए समानता स्वतंत्रता अन्याय व्यक्ति की गरिमा तथा राज्य की अखंडता और सुरक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है
(2) यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की आधार है
(3) मौलिक अधिकारों में समाज के दलित, शोषित, पीड़ित, और साधनहीन समाज में नई चेतना जागृत करके लोकतंत्र को सुद्रड बनाया है
(4) मौलिक अधिकारों ने सरकार की शक्तियों पर प्रतिबंध लगाकर देश में संवैधानिक और सीमित सरकार स्थापित करने में काफी सहायता पहुंचाई है
(5) मौलिक अधिकार राज्य और नागरिकों के संबंध सुनिश्चित करते हैं
(6) मौलिक अधिकार सामाजिक आर्थिक न्याय को बढ़ावा देते हैं
(7) मौलिक अधिकार संविधान के आधार स्तंभ है राज्य उन्हें समाप्त नहीं कर सकता
Q.2 - गांधीवादी सिद्धांत
Ans . (1) संविधान के अनुच्छेद 40 में गांव में ग्राम पंचायतें गठित करके उन्हें इतनी शक्तियां देने के निर्देश दिए गए हैं जिससे श्वासासन की इकाइयां बन सके
(2) संविधान के अनुच्छेद 43 में ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत और सहकारी आधार पर कुटीर और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने का निर्देश दिया गया है
(3) संविधान के अनुच्छेद 46 में राज्य के ऊपर समाज के कमजोर वर्गों जैसे अनुसूचित जातियों और कवियों को शिक्षा देने और उनके आर्थिक प्रगति के प्रयासों में तेजी लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कमजोर वर्गों को सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाने का निर्देश भी राज्य को इस अनुच्छेद द्वारा दिया गया है
(4) संविधान के अनुच्छेद 47 में राज्य को शराब और अन्य नशीली वस्तु पर रोक लगाने का निर्देश दिया है
(5) संविधान के अनुच्छेद 48 में निर्देश दिया है कि राज्य पशुओं की नस्ल सुधारने का प्रयास करें और गोवंश अन्य दूध देने वाले पशुओं की हत्या पर कानूनी प्रतिबंध लगाए
(6) संविधान के 42 वें संशोधन के अंतर्गत अनुच्छेद 48 (क) के द्वारा वन ,वन संपदा ,जंगली पशुओं और पर्यावरण का संरक्षण तथा उसमें सुधार लाने की जिम्मेदारी राज्य को सौंपी है
Q.3 - अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांत
Ans . अंतर्राष्ट्रीय शांति स्थापित करने से संबंधित महत्वपूर्ण बातों को नीति निदेशक सिद्धांतों में शामिल कर भारत ने विश्व के देशों के सामने एक मिसाल स्थापित की है इस सिद्धांतों का विवेचन संविधान अनुच्छेद 51 किया गया है
(1) राज अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को प्रोत्साहन देगा
(2) राज्य अन्य राज्यों से उचित और सम्मानजनक संबंध बनाए रखेगा
(3) अंतर्राष्ट्रीय संधियों और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और पालन करेगा
(4) अंतरराष्ट्रीय जागरण या विवादों का हल पंच निर्णय द्वारा किया जाएगा
निष्कर्ष यह कहा जा सकता है कि हमारे संविधान निर्माता एक नवीन समाज की स्थापना लोकतांत्रिक साधनों से उदारवादियों के लोकतंत्र तथा क्षमता संबंधी तत्वों का समन्वय करके एक मध्य मार्ग के द्वारा करना चाहते थे संविधान बनाने वाले उदारवाद ,समाजवाद ,गांधीवाद तथा अंतरराष्ट्रीयवाद से प्रभावित है और इन सब का समावेश करके एक नया सामान स्थापित करना चाहते थे जिससे सर्वमान्य रूप से न्यायोचित समाज व्यवस्था कहकर पुकारा जा सकता है
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