भारतीय संविधान के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हिंदी में
Q.1 - भारत में संविधान सभा का गठनAns . भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर पहली बार सन 1935 में एक संविधान सभा की मांग की थी यह विचार एम ०एन ० राय के दिमाग की उपज था ब्रिटिश सरकार ने सन 1940 के अगस्त प्रस्ताव में कांग्रेश इस बात को मांग लिया था वर्ष 1942 में क्रिप्स प्रस्ताव के तहत कांग्रेस की इस मांग को स्वीकार कर लिया गया
Q.2 - संविधान सभा का संगठन
Ans . कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत संविधान सभा नवंबर 1946 में अस्तित्व में आई
Q.3 - संविधान की प्रमुख विशेषताएं
Ans . 1 - कुल सीटों में से 93 सीट देसी रियासतों को और 296 सीट शेष ब्रिटिश भारत के लिए आवंटित की गई थी
2 - प्रत्येक प्रांत और सामंती राज्य को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थी
3 - ब्रिटिश भारत के अंतर्गत सभी सीटों को मुसलमानों, सिखों और सामान्य लोगों के बीच विभाजित किया गया था
4 - प्रत्येक समुदाय से 4 प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभा में मतदान द्वारा किया गया था
5 - रियासतों के प्रमुखों को यह अधिकार दिया गया था कि वह अपने प्रतिनिधियों का चुनाव स्वयं करें संविधान सभा के लिए चुनाव जुलाई 1946 में आयोजित किए गए
Q.4 - राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत
Ans . भारतीय संविधान की रचना का श्रेय मात्र संविधान सभा को ही नहीं दिया जा सकता है इसके पीछे उन सिद्धांतों का भी योगदान था जिन पर स्वतंत्रता आंदोलन अवधि में सहमति बनी थी यह सिद्धांत संविधान की रचना करने वालों ने राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत में प्राप्त किए थे संविधान सभा एकमात्र उन सिद्धांतों को मूर्त रूप प्रदान कर रही थी राष्ट्रीय आंदोलन से जिन सिद्धांतों को संविधान में शामिल किया गया था उनका सारण संविधान के उद्देश्य प्रस्ताव में देखा जा सकता है
Q.5 - संविधान बनाने में कुल कितना समय लगा था
Ans . 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे थे
Q.6 व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
Ans . व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार न मिलने पर लोकतांत्रिक शासन की व्यवस्था के बारे में कभी सोचा नहीं जा सकता है भारतीय संविधान में अनुच्छेद 20 से अनुच्छेद 22 तक नागरिकों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है
(1) अनुच्छेद 20 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को किसी ऐसे कानून को किसी ऐसे कानून को तोड़ने का दोषी मानकर दंडित नहीं किया जा सकता जो कानून को तोड़ने का अपराध करते समय लागू नहीं था
(2) किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार दंडित किया जा सकता है एक बार से अधिक दंडित नहीं किया जा सकता
(3) किसी भी व्यक्ति को अपने विरुद्ध गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता
(4) संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता कानून द्वारा बनाए गए नियमों के अतिरिक्त किसी अन्य तरीके से उससे छीनी नहीं जा सकती
(5) अनुच्छेद 22 में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को उसका अपराध बताए बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता
(6) बंदी बनाए गए व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर निकटतम मजिस्ट्रेट के न्यायालय के सामने पेश करना अनिवार्य है
(7) बंदी बनाए गए व्यक्ति को उसकी इच्छा अनुसार किसी भी वकील से कानूनी सलाह लेने का अधिकार है
(8) बंदी बनाए गए व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हवालात में रखने के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश लेना अनिवार्य है
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