आईए जानते हैं चंद्रमा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
चन्द्रमा - चंद्रमा हमारी पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है जिस प्रकार पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती तो वह सूर्य की परिक्रमा करते हैं उसी प्रकार चंद्रमा भी अपनी दूरी पर घूमते हुए पृथ्वी की परिक्रमा करता है इसके साथ-साथ चंद्रमा सूर्य की भी परिक्रमा करता रहता है रात के आकाश में सबसे तेज चमकने वाली चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता है यह सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होता है यह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है जो हमारी पृथ्वी पर लगभग 1.25 सेकंड में पहुंचता है इस प्रकाश को चांदनी कहते हैं
चंद्रमा की गतियां - चंद्रमा अपने अक्ष पर घूमते हुए 27 दिन 7 घंटे और 43 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है परंतु इस अवधि में पृथ्वी भी सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपनी कक्षा में आगे बढ़ जाती है इसलिए पृथ्वी पर किसी स्थान के ऊपर से पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके फिर उसी स्थान के ऊपर आने में चंद्रमा को 29 दिन 12 घंटे और 44 मिनट लगते हैं इतने ही समय में चंद्रमा अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा करता है इसी कारण हमें सदा चंद्रमा का एक ही भाग दिखाई देता है
चंद्रमा की कलाएं - आपको प्रतिदिन चंद्रमा के अलग-अलग आकार और रूप दिखाई देते हैं यह एक हास्य जैसी आकृति से शुरू होकर हर रात बड़ा होते हो तो थाली से बोर हो जाता है इसके बाद यह घटना शुरू करता है और घटते घटते बिल्कुल छुप जाता है इसके बाद या फिर बढ़ना शुरू करता है और यह क्रम चलता रहता है जिस रात चंद्रमा थाली सगोल दिखाई देता है उस रात को पूर्णिमा कहते हैं जसराज चंद्रमा बिल्कुल नहीं दिखाई देता उस रात को अमावस्या कहते हैं 1 महीने में एक बार पूर्णिमा और एक बार अमावस्या होती है चंद्रमा के आकार में पृथ्वी आने वाले इस बदलाव को हम चंद्रमा की कलाएं कहते हैं
सूर्य ग्रहण एवं चंद्र ग्रहण क्यों होता है - प्राचीन काल में मान्यता थी कि सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के लिए राहु एवं केतु नामक दो राक्षस उत्तरदाई है सूर्य ग्रहण के समय राहु सूर्य को तथा चंद्र ग्रहण के समय केतु चंद्रमा को निकल लेता है परंतु यह बात सही नहीं है भारत के महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने लगभग 1600 वर्ष पहले इस मान्यता का खंडन किया उन्होंने ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए बताया कि सूर्य ग्रहण, पृथ्वी पर चंद्रमा की छाया पड़ने के कारण होता है जबकि चंद्र ग्रहण चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ने के कारण होता है
रॉकेट की सहायता से सर्वप्रथम चंद्रमा पर कौन और कब गया था
Ans . रॉकेट की सहायता से मनुष्य चंद्रमा पर भी पहुंच चुका है 20 जुलाई 1969 को संयुक्त राज्य अमेरिका का अपोलो -11 नामक अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर पहुंचा इस यान से जाने वाले नील आर्मस्ट्रांग प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने चंद्रमा पर कदम रखा उनके अन्य सहयात्री एडमिन एल्डरिन एवं माइकल कॉलिंग थे अब तक की गई खोजों के अनुसार चंद्रमा पर वायुमंडल ना होने के कारण वहां जीवन संभव नहीं है भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट राकेश शर्मा अंतरिक्ष मैं यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय थे इन्होंने 2 अप्रैल 1984 को सोवियत संघ के अंतरिक्ष यान सोयूज टी -11 अंतरिक्ष की यात्रा की
वैज्ञानिकों के अनुसार - वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य से खतरनाक किरणें निकलती हैं यह किरणे हमारी आंखों के लिए हानिकारक है और हमें अंधा भी बना सकती है इसलिए सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे वैज्ञानिकों द्वारा निर्धारित विशेष चश्मे से ही देखना चाहिए
👉 मानव द्वारा ही उपग्रह बनाए गए हैं जो पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए इन्हें मानव निर्मित उपग्रह कहा जाता है जैसे भारत में आर्यभट्ट एजुसेट और ऑप्शन सेट नामक उपग्रह बनाए हैं
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