आइए जानते हैं कृषि के बारे में
Ans . 2.0 - 0.2 मिमी
Q.2 - बलुई मिट्टी में बालू ,सिल्ट एवं मृतिका % मात्रा कितनी होती है
Ans . 80-100, 100, 0-20, 0-20
Q.3 - उसर भूमि बनने का कारण क्या है
Ans . जिप्सम का प्रयोग करके
Q.4 - मृदा गठन क्या है, मृदा गठन के वर्गों पर विस्तार से वर्णन कीजिए
Ans . मृदा गठन के वर्गों का वर्णन -
(1) बलुई
(2) बलुई दोमट
(3) दोमट
(4) सिल्टी
(5) चिकनी मिट्टी में वर्गीकृत किया गया है
मृदा गठन के वर्गों का विस्तार
(1) बलुई - इसमें बालू की प्रतिशत मात्रा अधिक होती है 80-100 और सिल्ट तथा मृतिका की प्रतिशत मात्रा समान व कम 0-20, 0-20 होती है
(2) बलुई दोमट - इसमें बालों की मात्रा की प्रतिशत 50 से 80 तक होती है और सिल्ट का प्रतिशत मात्रा 0 से 50 होती है मृतिका के प्रतिशत मात्रा 0 से 20% होती है
(3) दोमट -दोमट मिट्टी में बालू 30 से 50% होती है सिल्ट 30 से 50% और मृत्तिका की प्रतिशत मात्रा 0 से 20% होती है
(4) सिल्टी - शिर्डी में बालू की मात्रा 0 से 20% तथा सिल्ट 50 से 70% और मृतिका में 30-50% होती है
(5) चिकनी मिट्टी - चिकनी मिट्टी में बालू 0 से 50% , सिल्ट 0.50% तथा मृतिका की प्रतिशत का सर्वाधिक 30 से 100% होती है
Q.5 - ऊसर भूमि का सुधार कैसे करें
Ans . (1) आंतरिक जल निकास के साथ बहाना - इस विधि में 1 मीटर गहराई पर भूमि के अंदर आयल दार नालियां बनाई जाती है इनका संबंध एक गहरी नाली से होता है खेत की मिट्टी को समतल कर दिया जाता है इसके बाद खेत में को कई बार पानी से भरा जाता है जिससे लवण गुल कर पानी के साथ नीचे बह जाते हैं तथा नालियों से बाहर निकल जाते हैं
(2) धरातल के ऊपर से बहाना - इस विधि में भूमि में जिधर ढाल होता है उस दिशा में जल निकास की नालियां बना देते हैं इसके बाद खेत में कई बार पानी भरा जाता है इससे लवण पानी में घोलकर नाली से बाहर चले जाते हैं
(3) खुरच कर निकालना - जब भूमि की ऊपरी सतह पर लवण होते हैं तो उनको खुरच कर बाहर निकाल देते हैं और उसके स्थान पर तालाब की मिट्टी भर देते हैं
(4) डोलबंदी करना - इस विधि में खेत की मेड़बंदी कर देते हैं जिससे वर्षा का पानी खेत से बाहर ना जाने पाए और लवण पानी में घोलकर भूमि की निचली सतह में चले जाते हैं
(5) निक्षालन - इस विधि में खेत की मेड बंदी कर देनी चाहिए तथा खेत को समतल कर जुताई करनी चाहिए और इसमें अधिक मात्रा में जिप्सम, गंधक,पाइराइट अथवा गन्ना की लदोई डालनी चाहिए और अच्छी तरह जोतकर जल भर देना चाहिए जिससे हानिकारक घुलनशील लवड़ बह जाते हैं
(6) गड्ढे खोदकर पानी निकालना - गड्ढों में वर्षा का पानी भर जाने से कठोर परत टूट जाती है दो-तीन वर्ष बाद इसमें जैव खाद का तथा तालाब की मिट्टी भर देते हैं
(7) ग्रीष्मकालीन जुताई करना - इससे कठोर परत टूट जाती है जिससे भूमि के अंदर जल निकास होने लगता है
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